बाल विकास के उपागम

बाल विकास के उपागम (Approaches of Child Development)

मानव व्यवहार के अध्ययन के लिए बाल विकास मे की विशिष्ट उपागम या विचार विधियों का प्रयोग किया जाता है ये उपागम निम्न है-

  1. प्रयोगात्मक उपागम (Experimental Approach)
  2. दैहिक उपागम (Physiological Approach)
  3. विकासात्मक उपागम (Developmental Approach)
  4. व्यक्तित्व संबंधी उपागम ( Personality Approach)

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1. प्रयोगात्मक उपागम (Experimental Approach )

इस उपागम के माध्यम से विभिन्न समस्याओ के अध्ययन में कार्य-कारण संबंध को जानने का प्रयास किया जाता है। इस उपागम के द्वारा एक विशिष्ठ व्यवहार किस परिस्थिति मे उत्पन्न होता है, और किसी विशेष परिस्थिति मे कोई किस प्रकार का व्यवहार करेगा इसकी बारे मे अध्ययन किया जाता है।

2. दैहिक उपागम (Physiological Approach )

इस उपागम के अनुसार नदी संस्थान (Nervous System )व्यक्ति के शरीर की सम्पूर्ण क्रियाओ को नियंत्रिक करता है। इसके द्वारा गर्भस्थ शिशु व उनके व्यवहार की समस्याओ का समाधान मुख्य रूप से किया जाता है। ये क्रियाएं शारीरिक भी हो सकती है और मानसिक भी। बाल विकास को दैहिकशास्त्र के ज्ञान को भी समझ जा सकता है, क्योंकि जैविक स्वयं एवं मानसिक स्वयं एक दूसरे से जुड़े हुए होते है।

3. विकासात्मक उपागम (Developmental Approach)

इस उपागम का भी प्रयोग विकास की विभिन्न अवस्थाओं मे आने वाली समस्याओं का निदान करने के लिए किया जाता है। इस उपागम को प्रयोग करने का मुख्य कारण यह भी है की जब बालक एक नई विकास अवस्था मे प्रवेश करता है तो उसमे कुछ नई रूचियाँ, कुछ नए लक्षण, कुछ नए शीलगुणों का निर्माण होता है। इस प्रकार के विशिष्ट समूह अवस्थाओ मे देखे जा सकते है। विकासात्मक उपागम के द्वारा बालक के विकास की मात्रा, गति व विशिष्टताओ की जानकारी प्रदान की जाती है। जो की अलग-अलग और सम्पूर्ण रूप से होती है।

4. व्यक्तित्व संबंधी उपागम ( Personality Approach)

बाल विकास की समस्याओ को समझने का यह एक उपागम है। किसी भी बालक का व्यवहार उसकी किसी पहलू को दर्शाता है। जन्म से ही अभिव्यक्ति की सुरुआत हो जाती है जो की व्यक्तित्व भी कहा जा सकता है। भिन्न-भिन्न व्यक्तित्व के कारण उनका व्यवहार भी अलग अलग होता है।

व्यक्तित्व के शीलगुणों के आधार पर व्यक्ति के व्यवहार, समायोजन, अभिवृती व आदतों का अध्ययन किया जाता है। अतः इनकी भविष्यवाणी करना भी संभव हो जाता है।

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